इंफोसिस (Infosys) के सीईओ सलिल पारेख ने हाल ही में उन खबरों का खंडन किया है जिनमें दावा किया गया था कि उनके एक कर्मचारी को अमेरिका से डिपोर्ट (निर्वासित) कर दिया गया है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि यह मामला 'डिपोर्टेशन' का नहीं, बल्कि 'डिनायल ऑफ एंट्री' (प्रवेश की अनुमति न मिलना) का था।
यहाँ इस पूरे मामले और इसके तकनीकी पहलुओं पर आधारित एक विस्तृत और SEO-फ्रेंडली लेख दिया गया है:
इंफोसिस CEO ने कर्मचारी को अमेरिका से 'डिपोर्ट' किए जाने की खबरों को नकारा; बताया क्या है पूरा मामला
प्रस्तावना
हाल ही में सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों पर यह खबर तेजी से फैली कि भारत की दिग्गज आईटी कंपनी इंफोसिस (Infosys) के एक कर्मचारी को अमेरिका से जबरन वापस भेज यानी डिपोर्ट कर दिया गया है। इस खबर ने एच-1बी (H-1B) वीजा धारकों और आईटी जगत में काफी हलचल पैदा कर दी। हालांकि, अब इंफोसिस के सीईओ सलिल पारेख ने आधिकारिक तौर पर इन खबरों को 'तथ्यात्मक रूप से गलत' बताया है।
क्या है पूरा विवाद? (Infosys Employee Case Details)
यह विवाद तब शुरू हुआ जब 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट वायरल हुई, जिसमें दावा किया गया कि मैसूर स्थित इंफोसिस का एक कर्मचारी, जो अमेरिका में ऑन-साइट प्रोजेक्ट पर था, उसे आईसीई (ICE) एजेंटों ने उठाया और दो घंटे के भीतर सामान पैक कर भारत लौटने या जेल जाने का विकल्प दिया।
सीईओ सलिल पारेख का स्पष्टीकरण:
14 जनवरी 2026 को तीसरी तिमाही के नतीजों के दौरान पारेख ने स्पष्ट किया कि:
किसी भी इंफोसिस कर्मचारी को अमेरिकी अधिकारियों द्वारा पकड़ा (Apprehended) नहीं गया है।
कुछ महीने पहले एक कर्मचारी को पोर्ट ऑफ एंट्री (हवाई अड्डे) पर प्रवेश देने से मना कर दिया गया था और उसे वापस भारत भेज दिया गया था।
यह एक प्रक्रियात्मक मामला था, न कि कोई कानूनी निर्वासन (Deportation)।
डिपोर्टेशन और डिनायल ऑफ एंट्री में अंतर
अक्सर लोग इन दोनों शब्दों को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन कानूनन इनमें बड़ा अंतर है:
| विशेषता | डिनायल ऑफ एंट्री (Denial of Entry) | डिपोर्टेशन (Deportation) |
| कब होता है? | देश की सीमा या एयरपोर्ट पर प्रवेश से पहले। | देश के अंदर प्रवेश करने के बाद। |
| कारण | अधूरे दस्तावेज, गलत वीजा श्रेणी या संदेहास्पद उद्देश्य। | कानून का उल्लंघन, वीजा की अवधि समाप्त होना या अपराध। |
| परिणाम | तुरंत अगली फ्लाइट से वापस भेजा जाना। | कानूनी कार्यवाही और भविष्य के लिए प्रतिबंध की संभावना। |
अमेरिकी इमिग्रेशन एंट्री क्यों मना कर सकता है?
भले ही आपके पास वैध वीजा हो, लेकिन अंतिम निर्णय इमिग्रेशन अधिकारी का होता है। मुख्य कारण ये हो सकते हैं:
वीजा श्रेणी का मिलान न होना: यदि आपका वीजा बिजनेस है लेकिन आप वहां काम करने जा रहे हैं।
दस्तावेजों में कमी: क्लाइंट लेटर या प्रोजेक्ट डिटेल्स का स्पष्ट न होना।
संदेहास्पद जवाब: एयरपोर्ट पर पूछे गए सवालों के असंतोषजनक जवाब देना।
इंफोसिस और भारतीय आईटी सेक्टर पर प्रभाव
इंफोसिस ने दोहराया है कि वे अमेरिकी आव्रजन कानूनों का पूरी तरह पालन करते हैं। कंपनी ने आश्वासन दिया है कि वे अपनी 'ऑन-साइट' और 'ऑफ-शोर' डिलीवरी मॉडल को स्थानीय और भारतीय प्रतिभाओं के तालमेल से जारी रखेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के छिटपुट मामले पूरी इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली पर सवाल नहीं उठाते, लेकिन कर्मचारियों को अपनी यात्रा के दौरान और अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।
निष्कर्ष
इंफोसिस के सीईओ का यह बयान अफवाहों पर लगाम लगाने के लिए महत्वपूर्ण है। तकनीकी पेशेवरों के लिए यह एक सीख है कि वे अपनी विदेश यात्रा से पहले सभी आव्रजन दस्तावेजों और नियमों को दोबारा जांच लें।
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